बैंक क्या है ?
बैंक का इतिहास
बैंक के सेवाऐ
- जनता के राशी को जमा करना
- जनता को ऋण तथा अग्रिम धन देना
- जनता के लिए एजेंट बनाकर कम करना
- विविध सेवाओं प्रदान करना
जनता को ऋण तथा अग्रिम धन देना
२ अधिविकर्श द्वारा
३ नकद साख
४ विलो की कटौती करके
बैंक अपने ग्राहक और अन्य विश्वसनीय व्यक्ति तथा संस्थाओ को केबल व्यब्सय अवं उत्त्पदन सबंदी कार्यो के लिए ऋण देते है ऋण देते समय बैंक रिनकर्ता के नाम से एक लेख खोलकर उसमे ऋण राशी जमा कर देते है जिसके बल पर ऋण कर्ता आवश्यकता के अनुसार समय समय पर अपना राशी निकलते रहते है अधिविकर्ष द्वारा ऋण देने से बैंक अपने जमाकर्ता को उसके करंट तथा बचत खाता से अधिक राशी निकालने का अधिकार दे देता है पर ऐसा करने से पहले ग्राहक को अपने बैंक के साथ निश्चित समझौता करना पढ़ता है बैंक व्यब्सयिक माल के जमानत पर तथा प्रन्पत्रो और सख्प्त्रो की साख पर भी ऋण देते है माल को गोदाम मे रखकर ताला लगाकर उसकी जमानत पर ऋण दिए जाते है ऋण देने से पहले बैंक माल के वास्तविक मूल्य पर छूट लगा देते है बिल की कटौती के द्वारा भी बैंक से ऋण प्राप्त किया जाता है कोई भी माल बिक्रेता अपने खरीदार के नाम विनिमय बिल लिखकर उसपर उसकी स्वीकृति प्राप्त करके किसी बैंक से उस स्वीकृति विल की कटौती करा लेता है कटौती करने पर बैंक अपने कमीशन काटकर विलधारक की दे देता है और फिर बिल की अबधि समाप्त होने पर उसे बिल के स्वीकृतिकर्ता से पूरी राशी मिल जाती है ये ऋण अलपकारी ऋण होता है